यह सत्य नहीं है कि जंगल और वृक्ष बादल और वर्षा को आकर्षित करते हैं क्योंकि हमें समुद्र पर बारिश होती हुई मिलती है। मनुष्य जंगलों को साफ करके और भूमि को कृषि के उद्देश्य के लिए बदलकर पृथ्वी की सतह पर किसी भी स्थान पर रह सकते हैं। लोग गायें पाल सकते हैं और इस तरह से सभी आर्थिक समस्याओं का समाधान हो सकता है। बस मनुष्य को अनाज उत्पादन और गायों की देखभाल का कार्य करने की आवश्यकता है। जंगलों में उपलब्ध लकड़ी का उपयोग झोंपड़ियाँ बनाने में किया जा सकता है। इस तरह से मानवता की आर्थिक समस्या का समाधान किया जा सकता है। इस समय पूरे विश्व में बहुत सी खाली भूमियाँ हैं और यदि इनका उचित उपयोग किया जाए तो भोजन की कोई कमी नहीं पड़ेगी। जहां तक बारिश का संबंध है, यज्ञ करने से ही वर्षा आती है। जैसा कि भगवद गीता (3.14) में कहा गया है:
अन्नाद् भवन्ति भूतानि
पर्जन्याद् अन्न-सम्भवः
यज्ञाद् भवति पर्जन्यो
यज्ञः कर्म-समुद्भवः
“सभी जीवों का पोषण अन्न से होता है जो वर्षा से उत्पन्न होता है। वर्षा यज्ञ [बलिदान] करने से होती है और यज्ञ निर्धारित कर्तव्यों से उत्पन्न होता है।” यज्ञ करने से मनुष्य को पर्याप्त वर्षा और फसल प्राप्त होगी।
