श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 30: प्रचेताओं के कार्यकलाप  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  4.30.23 
शुद्धाय शान्ताय नम: स्वनिष्ठया
मनस्यपार्थं विलसद्‌द्वयाय ।
नमो जगत्स्थानलयोदयेषु
गृहीतमायागुणविग्रहाय ॥ २३ ॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु, हम आपकी आराधना करने की प्रार्थना करते हैं। जब मन आप में स्थित रहता है, तो यह जगत् द्वैतपूर्ण होकर भी भौतिक सुख के स्थान के रूप में व्यर्थ प्रतीत होता है। आपका दिव्य रूप दिव्य आनंद से परिपूर्ण है। इसलिए, हम आपका सम्मान करते हैं। ब्रह्मा, विष्णु और शिव के रूप में आपका प्रकट होना इस दृश्यमान जगत की उत्पत्ति, पालन और विनाश के उद्देश्य से है।
 
O Lord, we beg to offer our obeisances unto You. When the mind is fixed upon You, this dualistic world, though a place of material pleasure, appears to be futile. Your transcendental form is full of transcendental bliss. Therefore we offer our obeisances unto You. Your manifestations as Brahma, Vishnu and Shiva are for the purpose of creation, sustenance and destruction of this cosmic manifestation.
तात्पर्य
हिंदी-परिभाषा: एक शुद्ध भक्त, जिसका मन सदा प्रभु की सेवा में लगा रहता है, निश्चित ही इस भौतिक दुनिया के नश्वर होने की सराहना कर सकता है। यद्यपि ऐसा भक्त भौतिक गतिविधियों को निष्पादित करने में लगा हो सकता है, इस अवस्था को अनासक्ति कहा जाता है। जैसा कि श्रील रूप गोस्वामी ने समझाया है, "अनासक्तस्य विषयान् यथार्हम् उपयुञ्जत:"। एक भक्त हमेशा भौतिक गतिविधियों से अनासक्त रहता है क्योंकि मुक्त अवस्था में उसका मन हमेशा भगवान के चरण कमलों पर लगा रहता है।

इस भौतिक दुनिया को द्वैत, द्वंद्व का संसार कहा जाता है। एक भक्त भली-भाँति जानता है कि इस भौतिक दुनिया के भीतर की हर चीज़ परमेश्वर की ऊर्जा का ही प्रकटीकरण है। प्रकृति के तीन गुणों को बनाए रखने के लिए, ईश्वर भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव के रूप में अलग-अलग रूप धारण करते हैं। प्रकृति के गुणों से अप्रभावित, भगवान इस ब्रह्मांडीय प्रकटीकरण को बनाने, बनाए रखने और नष्ट करने के लिए अलग-अलग रूप धारण करते हैं। निष्कर्ष यह है कि यद्यपि शुद्ध भक्त भगवान की सेवा में भौतिक गतिविधियों में संलग्न होता दिखाई देता है, वह भली-भाँति जानता है कि इंद्रिय सुख के लिए भौतिक सुख का कोई उपयोग नहीं है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)