इस भौतिक दुनिया को द्वैत, द्वंद्व का संसार कहा जाता है। एक भक्त भली-भाँति जानता है कि इस भौतिक दुनिया के भीतर की हर चीज़ परमेश्वर की ऊर्जा का ही प्रकटीकरण है। प्रकृति के तीन गुणों को बनाए रखने के लिए, ईश्वर भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव के रूप में अलग-अलग रूप धारण करते हैं। प्रकृति के गुणों से अप्रभावित, भगवान इस ब्रह्मांडीय प्रकटीकरण को बनाने, बनाए रखने और नष्ट करने के लिए अलग-अलग रूप धारण करते हैं। निष्कर्ष यह है कि यद्यपि शुद्ध भक्त भगवान की सेवा में भौतिक गतिविधियों में संलग्न होता दिखाई देता है, वह भली-भाँति जानता है कि इंद्रिय सुख के लिए भौतिक सुख का कोई उपयोग नहीं है।
