श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 30: प्रचेताओं के कार्यकलाप  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  4.30.22 
प्रचेतस ऊचु:
नमो नम: क्लेशविनाशनाय
निरूपितोदारगुणाह्वयाय ।
मनोवचोवेगपुरोजवाय
सर्वाक्षमार्गैरगताध्वने नम: ॥ २२॥
 
 
अनुवाद
प्रचेताओं ने कहा: हे भगवान, आप सभी प्रकार के कष्टों और दुखों को दूर करने वाले हैं। आपके उदार दिव्य गुणों और पवित्र नाम का प्रभाव शुभ और कल्याणकारी है। यह निर्णय पहले ही हो चुका है। आपकी गति मन और वचन से भी तीव्र है। भौतिक इंद्रियों द्वारा आपको समझा नहीं जा सकता। इसलिए, हम बार-बार आपको सम्मानपूर्वक नमन करते हैं।
 
The Prachetas said: O Lord, you are the destroyer of all kinds of afflictions. Your benevolent divine qualities and holy name are auspicious. This has already been decided. You can move faster than the mind and speech. You cannot be seen by the physical senses. Therefore, we repeatedly offer our respectful obeisances unto you.
तात्पर्य

इस आयत में, "निर्रुपित" शब्द, जिसका अर्थ है "निष्कर्षित", बहुत महत्वपूर्ण है। ईश्वर को खोजने या आध्यात्मिक ज्ञान में प्रगति करने के लिए किसी को भी शोध कार्य करने की ज़रूरत नहीं है। सब कुछ निश्चित रूप से वेदों में है। इसलिए भगवान भगवद-गीता (15.15) में कहते हैं, वेद-चरम-गुरुं हरिः: वेदों की प्रक्रिया के माध्यम से भगवान के परम व्यक्तित्व को समझना पूर्ण और निर्णायक है। वेद कहते हैं, अतः श्री-कृष्ण-नामदी न भवेद् ग्राह्यम इन्द्रियैः: प्रभु के पारलौकिक नाम, रूप, गुण, उपकार और मनोरंजन को हमारी कठोर भौतिक इंद्रियों द्वारा नहीं समझा जा सकता है। सेवामुने हि जिह्वादौ स्वयं एव फूर्त्य अदः: जब एक भक्त अपनी इंद्रियों को भक्ति सेवा में अनुकूल रूप से संलग्न करता है, तो प्रभु, अपनी अकारण दया के माध्यम से, स्वयं को भक्त के सामने प्रकट करते हैं। यह निश्चित वैदिक प्रक्रिया है। वेद यह भी बताते हैं कि केवल प्रभु के पवित्र नामों का जाप करने से ही कोई संदेह के बिना आध्यात्मिक रूप से उन्नत हो सकता है। हम मन या शब्दों की गति से ईश्वर के परम व्यक्तित्व से संपर्क नहीं कर सकते हैं, लेकिन अगर हम भक्ति सेवा से जुड़े रहते हैं तो हम आसानी से और जल्दी से उनसे संपर्क कर सकते हैं। दूसरे शब्दों में, परम भगवान भक्ति सेवा से आकर्षित होते हैं, और वे हमारी मानसिक अटकलों से संपर्क करने की हमारी गति से अधिक तेजी से हमसे संपर्क कर सकते हैं। प्रभु ने कहा है कि यद्यपि वह मानसिक अटकलों और विचार की गति की सीमा से परे हैं, उन्हें उनकी निःस्वार्थ दया से आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। इस प्रकार केवल उनकी निःस्वार्थ दया से ही उन्हें प्राप्त किया जा सकता है। अन्य तरीके प्रभावी नहीं होंगे।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)