श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 30: प्रचेताओं के कार्यकलाप  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  4.30.12 
भविता विश्रुत: पुत्रोऽनवमो ब्रह्मणो गुणै: ।
य एतामात्मवीर्येण त्रिलोकीं पूरयिष्यति ॥ १२ ॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारा एक उत्तम पुत्र होगा, जो भगवान ब्रह्मा जी से किसी भी तरह कम नहीं होगा। इसके फलस्वरूप, वह पूरे ब्रह्मांड में बहुत प्रसिद्ध होगा, और उसके द्वारा उत्पन्न पुत्र और पौत्र तीनों लोकों को भर देंगे।
 
You will all get a wonderful son who will not be inferior to Lord Brahma in any way. As a result, he will become very famous in the entire universe and the sons and grandsons born to him will fill the three worlds.
तात्पर्य
जैसा कि अगली कविता में बताया गया है, प्रचेता लोग महान ऋषि कंडु की बेटी से शादी करेंगे। यह सुझाव दिया गया है कि उनके पुत्र का नाम विश्रुत होगा और वह अपने अच्छे चरित्र के कारण अपने पिता और माता दोनों का गौरव बढ़ाएगा। वास्तव में, वह भगवान ब्रह्मा से भी महान होगें। महान राजनीतिज्ञ चाणक्य ने कहा, "यदि किसी बगीचे या जंगल के भीतर एक अच्छा वृक्ष है, तो उसके फूल अपनी खुशबू से जंगल को भर देंगे। इसी तरह, एक परिवार के भीतर एक अच्छा पुत्र पूरे परिवार को दुनिया भर में प्रसिद्ध कर देता है।" कृष्ण का जन्म यदु परिवार में हुआ था, और परिणामस्वरूप यदु वंश पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)