श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 3: श्रीशिव तथा सती का संवाद  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  4.3.9 
तस्मिन्भगिन्यो मम भर्तृभि: स्वकै-
र्ध्रुवं गमिष्यन्ति सुहृद्दिद‍ृक्षव: ।
अहं च तस्मिन्भवताभिकामये
सहोपनीतं परिबर्हमर्हितुम् ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
मुझे लगता है कि सभी बहनें अपने संबंधियों से मिलने की इच्छा से इस महायज्ञ में ज़रूर पधारी होंगी, अपने-अपने पतियों के साथ। मैं भी अपने पिताजी द्वारा दिए गए गहने पहनकर आपके साथ उस उत्सव में पधारना चाहती हूँ।
 
मुझे लगता है कि सभी बहनें अपने संबंधियों से मिलने की इच्छा से इस महायज्ञ में ज़रूर पधारी होंगी, अपने-अपने पतियों के साथ। मैं भी अपने पिताजी द्वारा दिए गए गहने पहनकर आपके साथ उस उत्सव में पधारना चाहती हूँ।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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