श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 3: श्रीशिव तथा सती का संवाद  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.3.1 
मैत्रेय उवाच
सदा विद्विषतोरेवं कालो वै ध्रियमाणयो: ।
जामातु: श्वशुरस्यापि सुमहानतिचक्रमे ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
मैत्रेय ने आगे कहा: इस प्रकार शिव और दक्ष के बीच सालों तक तनाव बना रहा।
 
मैत्रेय ने आगे कहा: इस प्रकार शिव और दक्ष के बीच सालों तक तनाव बना रहा।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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