यः कारणार्णव-जले भजति स्म योग-निद्राम् अनंत-जगद-अंड-सरोम-कूपः
यह भौतिक दुनिया महाविष्णु के सपने से बनी है। वास्तविक, तार्किक मंच आध्यात्मिक दुनिया है, पर जब आत्मा भगवान की सर्वोच्च शख्सियत की नकल करना चाहता है, तो उसे भौतिक सृष्टि के इस स्वप्नलोक में डाल दिया जाता है। प्रकृति के भौतिक तरीकों के संपर्क में आने के बाद, जीव सूक्ष्म और स्थूल शरीर विकसित करता है। जब जीव उदाहरण के लिए श्री नारद महामुनि या उनके सेवकों से जुड़ने के लिए काफी भाग्यशाली होता है, तो वह भौतिक सृष्टि के इस स्वप्नलोक और जीवन की शारीरिक अवधारणा से मुक्त हो जाता है।
