महान ऋषि मैत्रेय ने कहा: महान संत और परम भक्त नारद ने इस प्रकार राजा प्राचीनबर्हि के समक्ष भगवान और जीव की स्वाभाविक स्थिति का वर्णन किया। राजा को आमंत्रित करने के बाद, नारद मुनि सिद्धलोक को लौट गए।
Sage Maitreya said: The great saint and supreme devotee Narada thus presented the explanation of the natural state of the Lord and the living beings before King Prachinbarhi. Inviting the king, Narada Muni went back to Siddhalok.
तात्पर्य
सिद्धलोक और ब्रह्मलोक एक ही ग्रह प्रणाली के अंदर हैं। ब्रह्मलोक इस ब्रह्मांड का सबसे ऊँचा ग्रह माना जाता है। सिद्धलोक को ब्रह्मलोक के उपग्रहों में से एक माना जाता है। सिद्धलोक के निवासियों के पास योगिक रहस्यवाद की सारी शक्तियाँ हैं। इस श्लोक से ऐसा प्रतीत होता है कि महान ऋषि नारद सिद्धलोक के निवासी हैं, हालाँकि वे सभी ग्रह प्रणालियों की यात्रा करते हैं। सिद्धलोक के सभी निवासी अंतरिक्ष यात्री हैं, और वे यांत्रिक सहायता के बिना अंतरिक्ष में यात्रा कर सकते हैं। सिद्धलोक के निवासी अपनी योग सिद्धि के आधार पर एक ग्रह से दूसरे ग्रह पर अकेले जा सकते हैं। महान राजा प्राचीनबरही को निर्देश देने के बाद, नारद मुनि चले गए और उन्हें सिद्धलोक में भी आमंत्रित किया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥