आंखें, नाक और कान ये तीनों ही एक ही स्थान पर स्थित जोड़ीदार द्वार हैं। मुंह, गुप्तांग और गुदा अलग-अलग द्वार हैं। इन नौ द्वारों वाले शरीर में स्थित होकर जीव बाहर भौतिक जगत में काम करता है और रूप और स्वाद जैसे इंद्रिय के विषयों का भोग करता है।
Eyes, nostrils and ears—these doors are located in pairs at one place. Mouth, penis and anus are also other doors. Situated in the body with these nine doors, the living entity acts externally in the physical world and enjoys sense objects like sight and taste.
तात्पर्य
अपनी आध्यात्मिक स्थिति से अनजान होने के कारण चित्त द्वारा निर्देशित जीव भौतिक वस्तुओं का आनंद लेने के लिए नौ द्वारों से बाहर चला जाता है। भौतिक वस्तुओं के साथ लंबे समय तक संगति के कारण वह अपनी वास्तविक आध्यात्मिक गतिविधियों को भूल जाता है और इस प्रकार गुमराह हो जाता है। संपूर्ण विश्व वैज्ञानिकों और दार्शनिकों जैसे तथाकथित नेताओं द्वारा गुमराह किया जा रहा है, जिनके पास आत्मा का कोई ज्ञान नहीं है। इस प्रकार बद्ध जीव अधिक से अधिक उलझ जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥