जब तक बुद्धि, मन, इन्द्रियों, विषयों और भौतिक विशेषताओं से बना सूक्ष्म भौतिक शरीर मौजूद है, तब तक मिथ्या पहचान और उसका सापेक्ष उद्देश्य, स्थूल शरीर भी मौजूद होते हैं।
So long as the subtle physical body, composed of the intelligence, mind, senses, objects and the results of the physical modes, persists, the false ego and the gross body also persist.
तात्पर्य
सूक्ष्म मन, बुद्धि और अहंकार की इच्छाएँ मिट्टी, जल, वायु, अग्नि और आकाश तत्वों से बने स्थूल शरीर के बिना पूरी नहीं की जा सकतीं। जब स्थूल भौतिक शरीर प्रकट नहीं होता है, तो जीव वास्तव में भौतिक प्रकृति के गुणों में कार्य नहीं कर पाता है। इस श्लोक में यह स्पष्ट रूप से वर्णित किया गया है कि जीव के सूक्ष्म शरीर के कष्टों और सुखों के कारण मन और बुद्धि की सूक्ष्म गतिविधियाँ जारी रहती हैं। भौतिक पहचान की चेतना (जैसे "मैं" और "मेरा") अभी भी जारी है क्योंकि ऐसी चेतना अनादि काल से चली आ रही है। हालाँकि, जब कोई कृष्ण चेतना को समझने के आधार पर आध्यात्मिक दुनिया में स्थानांतरित हो जाता है, तो स्थूल और सूक्ष्म दोनों शरीरों की क्रियाओं और प्रतिक्रियाओं से आत्मा को कोई परेशानी नहीं होती है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥