प्राप्य पुण्य-कृतँ लोकान्
उषित्वा शाश्वती: समा:
शुचीनाम् श्रीमतां गेहे
योग-भ्रष्टोभिजायाते
""असफल योगी पुण्यात्मा जीवों के ग्रहों पर कई-कई साल तक विहार करने के बाद धार्मिक लोगों के परिवार में या सम्पन्न कुलीन परिवार में जन्म लेता है।""
अगर हम कृष्ण पर ध्यान के सिद्धांतों का पूरी दृढ़ता के साथ पालन करते हैं तो इसमें कोई संदेह नहीं है कि अगले जन्म में हम कृष्णलोक गोलोक वृन्दावन में स्थानांतरित हो जाएँगे।
