लब्ध्वा सुदुर्लभमिदं बहु-संभवान्ते
मानुषमर्थदमनित्यमपीहधीरः
तूर्णं यतेतनपतेदनुमृत्युयावन
निःश्रेयसायविषयःखलुसर्वतःस्यात्
कई जन्मों के बाद हमने यह मानवीय रूप प्राप्त किया है; इसलिए मृत्यु आने से पहले, हमें स्वयं को प्रभु की प्रेममयी सेवा में संलग्न करना चाहिए। यही मानव जीवन की परिपूर्णता है।
