षट्-कर्म-निपुणो विप्रो
मंत्र-तंत्र-विशारदः
अवैष्णवो गुरुर्न स्याद्
वैष्णवः श्व-पचो गुरुः
"यदि कोई ब्राह्मण भी वैदिक शास्त्रों में बहुत ही विद्वान है और ब्राह्मण के छह प्रमुख कर्तव्यों को जानता है, तो भी वह तब तक एक गुरु, या आध्यात्मिक गुरु नहीं बन सकता जब तक वह सर्वोच्च व्यक्तित्व भगवान का भक्त नहीं है। हालाँकि, अगर कोई कुत्ते खाने वाले परिवार में पैदा हुआ है, लेकिन भगवान का एक शुद्ध भक्त है, तो वह एक आध्यात्मिक गुरु बन सकता है।" निष्कर्ष यह है कि जब तक कोई प्रभु का शुद्ध भक्त नहीं बन जाता, तब तक वह आध्यात्मिक गुरु नहीं बन सकता। जो ऊपर दिए गए भक्ति सेवा के विवरण के अनुसार आध्यात्मिक गुरु है, उसे सर्वोच्च व्यक्ति ईश्वर के रूप में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित समझा जाना चाहिए। यहाँ वर्णित शब्दों के अनुसार (गुरु हरि), एक वास्तविक आध्यात्मिक गुरु से परामर्श करने का अर्थ है व्यक्तिगत रूप से सर्वोच्च व्यक्तित्व भगवान से परामर्श करना। इसलिए ऐसे एक वास्तविक आध्यात्मिक गुरु की शरण लेनी चाहिए। जीवन में सफलता का मतलब है एक ऐसे आध्यात्मिक गुरु को स्वीकार करना जो कृष्ण को एकमात्र सर्वोच्च प्रिय व्यक्तित्व के रूप में जानता है। भगवान के ऐसे विश्वासपात्र भक्त की पूजा करनी चाहिए।
