सर्वस्य चाहं हृदि संनिविष्टो
मत्तः स्मृतिर्ज्ञानमपोहनं च
"मैं सबके हृदय में विराजमान हूँ और मुझसे ही स्मृति, ज्ञान और विस्मृति आती है।"
शरीर के भीतर परमात्मा द्वारा ही हर चीज का निर्देशन किया जा रहा है; इसलिए शौर्य का श्रेष्ठ भाग उनके निर्देशन को लेना और खुश रहना है। उनका निर्देशन लेने के लिए, किसी को भक्त होने की आवश्यकता है, और यह भगवद्गीता (10.10) में भी पुष्टि की गई है:
तेषां सतत-युक्तानां
भजतां प्रीति-पूर्वकम्
ददामि बुद्धि-योगं तं
येन मामुपयान्ति ते
"जो लगातार भक्त हैं और प्रेम से मेरी पूजा करते हैं, मैं उन्हें वह समझ देता हूँ जिससे वे मेरे पास आ सकते हैं।"
हालांकि परमात्मा हर किसी के हृदय में हैं (ईश्वरः सर्व-भूतानां हृद-देशेऽर्जुन तिष्ठति), वे केवल शुद्ध भक्तों से बात करते हैं जो लगातार उनकी सेवा में लगे रहते हैं। चैतन्य-भागवत (अन्त्य 3.45) में कहा गया है:
ताहारे से बलि विद्या, मंत्र, अध्यायन
कृष्ण-पाद-पद्मे ये कराये स्थिर मन
"जिसने अपने मन को कृष्ण के चरण कमलों में स्थिर कर लिया है, उसे सर्वोत्तम शिक्षा प्राप्त करने वाला और सभी वेदों का अध्ययन करने वाला समझा जाना चाहिए।" चैतन्य-भागवत में अन्य उपयुक्त उद्धरण भी दिए गए हैं:
से से विद्यारा फल जानिह निश्चय
कृष्ण-पाद-पद्मे यदि चित्त-वृत्ति राय
"शिक्षा का परिपूर्ण परिणाम कृष्ण के चरण कमलों में मन को स्थिर करना है।" (आदि 13.178)
‘दिग-विजय करिबा,’ — विद्यारा कार्य नहे
ईश्वरे भजिले, से विद्या ‘सत्य’ कहे
"भौतिक शिक्षा के माध्यम से दुनिया को जीतना वांछनीय नहीं है। यदि कोई भक्ति सेवा में लग जाता है, तो उसकी शिक्षा पूर्ण हो जाती है।" (आदि 13.173)
पड़े केने लोका — कृष्ण-भक्ति जानिबारे
से यदि नहिला, तबे विद्याय की करे
"शिक्षा का उद्देश्य कृष्ण और उनकी भक्ति को समझना है। यदि कोई ऐसा नहीं करता है, तो शिक्षा झूठी है।" (आदि 12.49)
ताहारे से बलि धर्म, कर्म सदाचार
ईश्वरे से प्रीति जन्मे सम्मत सबार
"संस्कारी, शिक्षित, बहुत सक्रिय और धार्मिक होने का अर्थ कृष्ण के लिए स्वाभाविक प्रेम का विकास करना है।" (अन्त्य 3.44) कृष्ण के लिए सभी के हृदय में प्रेम सुप्त है, और संस्कृति और शिक्षा से उसे जगाना होता है। यही कृष्ण चेतना आंदोलन का उद्देश्य है। एक बार भगवान चैतन्य ने श्री रामांनंद राय से पूछा कि शिक्षा का सबसे अच्छा हिस्सा क्या है, और रामांनंद राय ने उत्तर दिया कि शिक्षा का सबसे अच्छा हिस्सा कृष्ण चेतना में प्रगति है।
