हे राजर्षि, जो भक्त प्रभु श्री कृष्ण के परम कृपा पात्र हैं जो प्रभु श्री कृष्ण की गुणों का गुणगान हर पल करता है और प्रभु श्री कृष्ण की भक्ति में और उनके गुणों को सुनने के कार्य में हमेशा लिप्त रहता है, वह शीघ्र ही प्रभु श्री कृष्ण के दर्शन के लायक हो जाता है।
O King, one who is full of faith, who constantly hears the glories of the Lord, who is always engaged in the cultivation of Krishna consciousness and in listening to the activities of the Lord, soon becomes capable of seeing the Lord.
तात्पर्य
वासुदेव की अलौकिक प्रेममयी सेवा में लगातार संलग्न होने का अर्थ है प्रभु के गुणों को निरंतर सुनना। भक्ति-योग के सिद्धांत - श्रवणं कीर्तनं विष्णोः स्मरणं पाद-सेवनं / अर्चनं वन्दनं दास्यं सख्यम् आत्म-निवेदनम - ये पूर्णता प्राप्त करने का एकमात्र साधन हैं। केवल प्रभु के गुणों के बारे में सुनने से ही व्यक्ति का विकास अलौकिक स्थिति मे होता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥