यथा हि पुरुषो भारं शिरसा गुरुमुद्वहन् ।
तं स्कन्धेन स आधत्ते तथा सर्वा: प्रतिक्रिया: ॥ ३३ ॥
अनुवाद
इंसान अपने सिर पर बोझ उठा सकता है और जब उसे वह बोझ बहुत ज़्यादा लगने लगे तो वो कभी-कभी बोझ को कंधों पर रखकर अपने सिर को आराम देता है। इस तरह वो बोझ से छुटकारा पाने की कोशिश करता है। लेकिन, वो बोझ से मुक्त होने के लिए चाहे कोई भी उपाय अपनाए, असल में वो सिर्फ़ बोझ को एक जगह से दूसरी जगह ले जाता है।
Man can carry a burden on his head and when it seems heavy to him, he sometimes puts the burden on his shoulder and gives his head a rest. In this way he tries to get rid of the burden. Yet, whatever method he devise to get rid of this burden, he can do no more than move the burden from one place to another.
तात्पर्य
ये किसी बोझ को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँचाने के प्रयास का उचित वर्णन है। जब कोई व्यक्ति अपने सिर पर बोझ उठाने से थक जाता है तो वह उसे अपने कंधे पर रख लेता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि उसे बोझ उठाने के कष्ट से मुक्ति मिल गई है। इसी तरह, मानव समाज एक प्रकार की समस्या से बचने के लिए सभ्यता के नाम पर दूसरी प्रकार की समस्या उत्पन्न कर रहा है। हम देखते हैं कि आज की सभ्यता में हम एक जगह से दूसरी जगह तेजी से पहुंचने के लिए कई प्रकार के ऑटोमोबाइल बना रहे हैं, पर साथ ही साथ हमने कई और समस्याएँ भी उत्पन्न कर ली हैं। हमें बहुत सारी सड़कें बनानी पड़ती हैं और फिर भी ये सड़कें ऑटोमोबाइल की भीड़ और ट्रैफिक जाम को नियंत्रित करने में कम पड़ जाती हैं। साथ ही वायु प्रदूषण और ईंधन की कमी की भी समस्याएँ हैं। निष्कर्ष यह है कि हमारे कष्टों को कम करने या उनका विरोध करने के लिए हम जो उपाय अपनाते हैं वे वास्तव में हमारे कष्टों की समाप्ति नहीं करते हैं। ये सब केवल भ्रम है। हम बस बोझ को सिर से कंधे पर रख देते हैं। अपनी समस्याओं को कम करने का एकमात्र वास्तविक उपाय परमेश्वर श्री कृष्ण के शरणागत हो जाना और उनकी सुरक्षा में स्वयं को समर्पित कर देना है। भगवान सब शक्तिशाली हैं और वे भौतिक अस्तित्व में हमारे कष्टदायी जीवन को सुखमय बना सकते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥