ऊर्ध्वं गच्छन्ति सत्व-स्था
मध्ये तिष्ठन्ति राजसः
जघन्य-गुण-वृत्ति-स्था
अधो गच्छन्ति तामसः
"सत्व गुण में स्थित जीव धीरे-धीरे ऊपर उठकर उच्चतर ग्रहों में जाते हैं; रजो गुण में स्थित पृथ्वी लोक में निवास करते हैं; और तमोगुण में स्थित निम्नतर प्रजातियों में चले जाते हैं।"
विभिन्न ग्रहीय प्रणालियों में जीवन की अनेक विविधताएँ हैं, और यह सत्व, रज और तम गुणों को विकसित करने से प्राप्त होती हैं। यदि कोई सत्व गुण में है, तो वह उच्चतर प्रणालियों में जाता है; यदि रजोगुण में है, तो वह मध्यवर्ती प्रणालियों में रहता है; और यदि तमोगुण में है, तो उसे निम्नतर जीवन-प्रजातियों में धकेल दिया जाता है।
