तब ऋषिवर बोले- तुम जानो कि पुरञ्जन रूपी जीव अपने कर्म के अनुसार विभिन्न रूपों में देह परिवर्तन करता रहता है। ये रूप एक, दो, तीन, चार या अनेक पाँव वाले या पाँवविहीन भी हो सकते हैं। इन विभिन्न प्रकार के रूपों में देह परिवर्तन करने वाला जीव तथाकथित भोक्ता के रूप में पुरञ्जन कहलाता है।
Narada Muni said: You should know that the soul in the form of Puranjan keeps on transmigrating in different forms according to his karma, which can be with one, two, three, four or many legs or without legs. The soul transmigrating in these different types of forms is called Puranjan in the form of the so-called enjoyer.
तात्पर्य
आत्मा कैसे एक प्रकार के शरीर से दूसरे प्रकार के शरीर में प्रवेश करती है, इसका बखूबी वर्णन यहाँ किया गया है। “एकापाद” यानि एक पैर वाला शब्द प्रेतों को दर्शाता है, क्योंकि कहा जाता है कि प्रेत एक पैर से चलते हैं। द्विपाद शब्द का अर्थ है “दो पैरों वाला”, जो मनुष्यों पर लागू होता है। जब कोई मनुष्य बूढ़ा और कमज़ोर हो जाता है, तो माना जाता है कि वह त्रिपाद या तीन पैरों वाला हो जाता है, क्योंकि वह किसी छड़ी या बैसाखी के सहारे चलता है। निश्चित रूप से, “चतुष्पाद” शब्द चतुष्पद या जानवरों को दर्शाता है। “बहुपाद” शब्द उन प्राणियों को दर्शाता है जिनके चार से अधिक पैर होते हैं। सेंटीपीड जैसे कई कीड़े और कई जलीय जानवर होते हैं जिनके कई पैर होते हैं। “अपादक” शब्द का अर्थ है “बिना पैर वाला”, जो सर्पों को दर्शाता है। “पुरंजना” नाम ऐसे व्यक्ति का संकेत देता है जो विभिन्न प्रकार के शरीरों को रखने का आनंद लेता है। भौतिक जगत में आनंद लेने की उसकी मानसिकता को विभिन्न प्रकार के शरीरों द्वारा सुनिश्चित किया जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥