अहं भवान्न चान्यस्त्वं त्वमेवाहं विचक्ष्व भो: ।
न नौ पश्यन्ति कवयश्छिद्रं जातु मनागपि ॥ ६२ ॥
अनुवाद
हे मेरे मित्र, मैं, परमात्मा, और तुम, आत्मा, गुणों में भिन्न नहीं हैं, क्योंकि हम दोनों ही आध्यात्मिक हैं। वास्तव में, हे मित्र, तुम मेरी संवैधानिक स्थिति में गुणात्मक रूप से मुझसे भिन्न नहीं हो। बस इस विषय पर विचार करने का प्रयास करो। जो वास्तव में उच्च विद्वान हैं, जिन्हें ज्ञान है, वे तुममें और मुझमें कोई गुणात्मक अंतर नहीं पाते।
O friend, though I am the Supreme Soul and you are the soul, we are not different in qualities, because we are both spiritual. In fact, O friend, you are not qualitatively different from me even in your natural state. Think a little on this matter. Those who are really great scholars and have knowledge do not find any qualitative difference between you and me.
तात्पर्य
भगवान और जीव दोनों गुणों में मात्रात्मक रूप से एक हैं। दोनों के बीच वास्तविक रूप से कोई अंतर नहीं है। मायावादी दार्शनिक बार-बार भ्रामक ऊर्जा से पराजित होते हैं क्योंकि वे सोचते हैं कि परमात्मा और आत्मा के बीच कोई भेद नहीं है या परमात्मा नहीं होता है। मगर वे यह सोच कर भी भ्रमित हैं कि सब कुछ परमात्मा है। यद्यपि, जो लोग विद्वान होते हैं, वे वास्तव में तथ्यों को जानते हैं। वे ऐसी गलतियाँ नहीं करते हैं। वे जानते हैं कि भगवान और आत्मा गुणवत्ता में एक हैं, लेकिन आत्मा माया के चंगुल में फँस जाती है, जबकि परमात्मा, जो कि भगवान है, माया के नियंत्रक हैं। माया परम प्रभु का सृजन है (माया सरस); इसलिए भगवान माया के नियंत्रक हैं। यद्यपि भगवान के साथ गुणवत्ता में एक है, आत्मा माया के नियंत्रण में है। मायावादी दार्शनिक नियंत्रक और नियंत्रित के बीच भेद नहीं कर सकते।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥