ब्रह्मांड भ्रमित कोन भाग्यवान जीवा
गुरु-कृष्ण-प्रसादे पाया भक्ति-लता-बीजा
जीव कई प्रकार की प्रजातियों में भटकता है, लेकिन वह भाग्यशाली होता है जब वह एक बार फिर से अपने मित्र से मिलता है, या तो व्यक्तिगत रूप से या उसके प्रतिनिधि के माध्यम से।
वास्तव में, यह कृष्ण ही हैं जो सभी जीवों को घर लौटने, भगवान के पास वापस जाने की व्यक्तिगत रूप से सलाह देते हैं। कभी-कभी कृष्ण अपने प्रतिनिधि को भेजते हैं, जो कृष्ण के संदेश को देते हुए, सभी जीवों से घर लौटने, भगवान के पास वापस जाने का अनुरोध करता है। दुर्भाग्य से जीव भौतिक आनंद से इतना अधिक जुड़ा होता है कि वह कृष्ण या उनके प्रतिनिधि के निर्देशों को बहुत गंभीरता से नहीं लेता है। इस भौतिक प्रवृत्ति को इस श्लोक में ग्राम्य-मति:, इंद्रिय संतुष्टि के रूप में उल्लेख किया गया है। महिम शब्द का अर्थ है "इस भौतिक दुनिया के भीतर"। इस भौतिक दुनिया के भीतर सभी जीव कामुक प्रवृत्ति वाले हैं। फलस्वरूप वे विभिन्न प्रकार के शरीरों में उलझ जाते हैं और भौतिक अस्तित्व की पीड़ा को झेलते हैं।
