मान-मना भव मद्-भक्तो
मद्-याजी माँ नमस्करु
माँ एवैष्यसि युक्त्वंव
आत्मानं मत-परायणः
"अपने दिमाग को हमेशा मेरे बारे में सोचने में लगाएं और मेरे भक्त बने। नमस्कार करें और मेरी पूजा करें। मुझमें पूरी तरह से लीन होकर, निश्चित रूप से आप मेरे पास आएंगे"।
मानव समाज का मुख्य व्यवसाय हर समय भगवान के बारे में सोचना, उनके भक्त बनना, भगवान की पूजा करना और उनके आगे झुकना है। आचार्य, भगवान के अधिकृत प्रतिनिधि, इन सिद्धांतों को स्थापित करता है, लेकिन जब वह गायब हो जाता है, तो चीजें फिर से अव्यवस्थित हो जाती हैं। आचार्य के परिपूर्ण शिष्य आध्यात्मिक गुरु के निर्देशों का ईमानदारी से पालन करके स्थिति को सुधारने का प्रयास करते हैं। इस समय व्यावहारिक रूप से पूरी दुनिया बदमाशों और गैर-भक्तों से डरती है; इसलिए इस कृष्णभावनामृत आंदोलन को अधार्मिक सिद्धांतों से दुनिया को बचाने के लिए शुरू किया गया है। दुनिया में वास्तविक शांति और खुशी लाने के लिए हर किसी को इस आंदोलन का सहयोग करना चाहिए।
