दुष्ट मन, तुमी किसरा वैष्णव?
प्रतिष्ठार तारे, निर्जनरा घरे,
तूवा हरिनाम केवल कैतव
"हे मेरे मन, तू किस प्रकार का भक्त है। केवल सस्ती प्रशंसा के लिए तू एकाकी स्थानों पर बैठता है और हरि कृष्ण महामंत्र का जाप करने का ढोंग करता है, लेकिन यह सब धोखा है।" इस प्रकार, भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर ने समर्थन किया कि एक कुशल आध्यात्मिक गुरु के दिशा-निर्देशन में प्रत्येक भक्त पूरे विश्व में भक्तिपंथ, कृष्णभावनामृत का प्रचार करे। केवल तभी जब कोई परिपक्व हो जाएँ, वह एकांत स्थान पर बैठ सकते हैं और पूरे विश्व में प्रचार करने से संन्यास ले सकते हैं। इस उदाहरण का अनुसरण करते हुए, इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस के भक्त अब विश्व के विभिन्न हिस्सों में प्रचारकों के रूप में सेवा प्रदान करते हैं। अब वे आध्यात्मिक गुरु को सक्रिय प्रचार कार्य से संन्यास लेने की अनुमति दे सकते हैं। आध्यात्मिक गुरु के जीवन के अंतिम चरण में, आध्यात्मिक गुरु के भक्तों को प्रचार गतिविधियाँ अपने हाथ में लेनी चाहिए। इस प्रकार, आध्यात्मिक गुरु एकांत स्थान पर बैठ सकते हैं और निर्जन भजन कर सकते हैं।
