'पाण्ड्य' शब्द 'पंडा' शब्द से आया है, जिसका अर्थ है "ज्ञान।" जब तक कोई अत्यधिक विद्वान नहीं होता, वह गैर-भक्ति अवधारणाओं को जीत नहीं सकता। 'पर' शब्द का अर्थ है "पारलौकिक", और 'पुरा' का अर्थ है "शहर"। परापुर वैकुण्ठ है, जो भगवान का राज्य है, और 'जय' शब्द उस व्यक्ति को संदर्भित करता है जो जीत सकता है। इसका अर्थ यह है कि एक शुद्ध भक्त, जो भक्ति सेवा में दृढ़ है और जिसने सभी गैर-भक्ति अवधारणाओं को जीत लिया है, वह भी भगवान के राज्य को जीत सकता है। दूसरे शब्दों में, कोई भी भक्ति सेवा करके ही भगवान के राज्य वैकुण्ठ को जीत सकता है। भगवान का सर्वोच्च व्यक्तित्व अजित कहलाता है, जिसका अर्थ है कि कोई उसे जीत नहीं सकता, लेकिन एक भक्त, भगवान के सर्वोच्च व्यक्तित्व के प्रति मजबूत भक्ति सेवा और ईमानदारी से लगाव करके आसानी से उसे जीत सकता है। भगवान कृष्ण सभी के लिए भय के प्रतीक हैं, लेकिन उन्होंने स्वेच्छा से माँ यशोदा की छड़ी से डरने के लिए सहमति व्यक्त की। कृष्ण, भगवान, को उनके भक्त के अलावा कोई नहीं जीत सकता। ऐसा भक्त विदर्भ के राजा की बेटी से दयालुता से विवाह करता है।
