श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 28: अगले जन्म में पुरञ्जन को स्त्री-योनि की प्राप्ति  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  4.28.17 
अहं ममेति स्वीकृत्य गृहेषु कुमतिर्गृही ।
दध्यौ प्रमदया दीनो विप्रयोग उपस्थिते ॥ १७ ॥
 
 
अनुवाद
राजा पुरञ्जन अपने परिवार के प्रति अति आसक्त थे और "मैं" और "मेरा" के विचारों में लिप्त थे। उनकी पत्नी के प्रति अत्यधिक मोह होने के कारण, वह पहले से ही दरिद्र हो चुके थे। वियोग के समय, वह अत्यधिक दुखी हो गए।
 
King Purañjana was very attached to his family and to the thought of “I” and “mine”. Since he was very much attached to his wife, he had already become miserable. At the time of separation, he became very sad.
तात्पर्य
इस श्लोक में यह स्पष्ट है कि मृत्यु के समय भौतिक भोग की सोच जाती नहीं है। यह दर्शाता है कि जीवात्मा, आत्मा, सूक्ष्म शरीर-मन, बुद्धि और अहंकार द्वारा धारण की जाती है। मिथ्या अहंकार के कारण, जीवात्मा अभी भी भौतिक दुनिया का आनंद लेना चाहता है, और भौतिक भोग की चाह में वह दुखी या उदास होता है। वह अभी भी अपने अस्तित्व को आगे बढ़ाने के लिए बौद्धिक योजनाएँ बनाता है, और इसलिए, यद्यपि वह स्थूल शरीर को त्याग देता है, उसे सूक्ष्म शरीर द्वारा दूसरे स्थूल शरीर तक ले जाया जाता है। सूक्ष्म शरीर का संक्रमण भौतिक आँखों को कभी दिखाई नहीं देता; इसलिए जब कोई स्थूल शरीर को छोड़ता है, तो हम सोचते हैं कि वह समाप्त हो गया है। भौतिक भोग की योजनाएँ सूक्ष्म शरीर द्वारा बनाई जाती हैं, और स्थूल शरीर इन योजनाओं का आनंद लेने का साधन है। इस प्रकार स्थूल शरीर की तुलना पत्नी से की जा सकती है, क्योंकि पत्नी सभी प्रकार के संवेदात्मक सुख का एजेंट होती है। स्थूल शरीर के साथ लंबे जुड़ाव के कारण, जीवात्मा उससे अलग होने पर बहुत दुखी हो जाता है। जीवात्मा की मानसिक गतिविधि उसे दूसरा स्थूल शरीर स्वीकार करने और अपने भौतिक अस्तित्व को जारी रखने के लिए बाध्य करती है।

संस्कृत शब्द स्त्री का अर्थ है "विस्तार"। पत्नी के माध्यम से व्यक्ति अपने आकर्षण की विभिन्न वस्तुओं - बेटों, बेटियों, पोतों आदि का विस्तार करता है। मृत्यु के समय परिवार के सदस्यों के प्रति लगाव बहुत प्रमुख हो जाता है। अक्सर देखने को मिलता है कि कोई व्यक्ति अपने शरीर को छोड़ने से ठीक पहले अपने प्यारे बेटे को अपनी पत्नी और अन्य सामग्री का कार्यभार देने के लिए बुला सकता है। वह कह सकता है, "मेरे प्यारे लड़के, मुझे जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। कृपया परिवार के मामलों का ध्यान रखना।" वह इस तरह से बोलता है, अपने गंतव्य को जाने बिना भी।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)