दुहितृ: पुत्रपौत्रांश्च जामिजामातृपार्षदान् ।
स्वत्वावशिष्टं यत्किञ्चिद् गृहकोशपरिच्छदम् ॥ १६ ॥
अनुवाद
तब राजा पुरंजना ने अपनी बेटियों, बेटों, नाती-पोतों, बहू-जमाईयों, नौकरों और अन्य साथियों के साथ-साथ अपने घर, घर के सामान और धन-सम्पत्ति के बारे में सोचना शुरू किया।
Then King Purañjana began to think of his daughters, sons, grandsons, daughters-in-law, sons-in-law, servants and other councillors, as well as of his house, all its furnishings and all the wealth that he had accumulated.
तात्पर्य
यह बात कोई असामान्य नहीं है कि भौतिक शरीर से अत्यधिक जुड़ा व्यक्ति किसी वैद्य से अपने जीवन को कम से कम कुछ समय के लिए बढ़ाने के लिए अनुरोध करता है। यदि तथाकथित वैज्ञानिक वैद्य ऑक्सीजन या अन्य दवाओं के उपयोग से किसी के जीवन को कुछ मिनटों के लिए भी बढ़ाने में सक्षम है, तो वह सोचता है कि वह अपने प्रयासों में बहुत सफल है, हालाँकि अंततः रोगी की मृत्यु हो जाएगी। इसे अस्तित्व के लिए संघर्ष कहा जाता है। मृत्यु के समय रोगी और वैद्य दोनों ही जीवन को लम्बा करने के बारे में सोचते हैं, हालाँकि शरीर के सभी घटक व्यावहारिक रूप से मर चुके होते हैं और चले जाते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥