श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 28: अगले जन्म में पुरञ्जन को स्त्री-योनि की प्राप्ति  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  4.28.15 
शिथिलावयवो यर्हि गन्धर्वैर्हृतपौरुष: ।
यवनैररिभी राजन्नुपरुद्धो रुरोद ह ॥ १५ ॥
 
 
अनुवाद
गंधर्वों और यवन सैनिकों ने सर्प के शरीर के अंगों को जर्जर कर दिया, जिससे उसकी शारीरिक शक्ति पूरी तरह से नष्ट हो गई। जब उसने शरीर त्यागने का प्रयास किया, तो उसके दुश्मनों ने उसे रोक लिया। इस प्रकार अपने प्रयास में विफल होने के कारण वह जोर-जोर से चिल्लाने लगा।
 
The body parts of that serpent were mangled by the Gandharvas and Yavanas because they had defeated his physical strength. When he tried to give up his body, his enemies stopped him. Being unsuccessful in his attempt, he started screaming loudly.
तात्पर्य
जीवन के अंतिम चरण में, शरीर के विभिन्न द्वार रोग के प्रभाव से अवरूद्ध हो जाते हैं, जो पित्त, कफ और वायु के असंतुलन के कारण होता है। इस प्रकार जीव स्पष्ट रूप से अपनी कठिनाइयों को व्यक्त नहीं कर सकता है, और आसपास के रिश्तेदार एक मरते हुए व्यक्ति से "घुरा घुरा" ध्वनि सुनते हैं। अपने मुकुंद-माला-स्तोत्र में, राजा कुलशेखर कहते हैं:

कृष्ण त्वद्दिया-पदपंकज-पंजरान्तम्

अद्यैव मे विशतु मानस-राज-हंसः

प्राण-प्रयाण-समये कफ-वात-पित्तैः

कंठा वरोधन-विधौ स्मरणं कुतस्ते

" मेरे प्रिय कृष्ण, कृपया मुझे तुरंत मरने में मदद करें ताकि मेरे मन का हंस आपके चरण कमल के तने से घिरा रहे। अन्यथा मेरे अंतिम सांस के समय, जब मेरा गला अवरुद्ध हो जाएगा, तो मेरे लिए तुम्हें कैसे याद करना संभव होगा? " हंस पानी में गोता लगाने और कमल के फूल के तने से घिरे होने में बहुत आनंद लेता है। यह उलझाव हर्षोल्लास है। यदि, हमारी स्वस्थ स्थिति में, हम भगवान के चरण कमलों के बारे में सोचते हैं और मर जाते हैं, तो यह सबसे भाग्यशाली है। वृद्धावस्था में, मृत्यु के समय, कभी-कभी गला बलगम से घुट जाता है या वायु से अवरुद्ध हो जाता है। ऐसे समय में हरे कृष्ण का ध्वनि कंपन, महा-मंत्र, बाहर नहीं आ सकता है। इस प्रकार व्यक्ति कृष्ण को भूल सकता है। बेशक, जो लोग कृष्ण भावना में मजबूत हैं वे किसी भी अवस्था में कृष्ण को नहीं भूल सकते क्योंकि वे हरे कृष्ण मंत्र का जाप करने के आदी हैं, खासकर जब मृत्यु से संकेत मिलता है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)