कृष्ण त्वद्दिया-पदपंकज-पंजरान्तम्
अद्यैव मे विशतु मानस-राज-हंसः
प्राण-प्रयाण-समये कफ-वात-पित्तैः
कंठा वरोधन-विधौ स्मरणं कुतस्ते
" मेरे प्रिय कृष्ण, कृपया मुझे तुरंत मरने में मदद करें ताकि मेरे मन का हंस आपके चरण कमल के तने से घिरा रहे। अन्यथा मेरे अंतिम सांस के समय, जब मेरा गला अवरुद्ध हो जाएगा, तो मेरे लिए तुम्हें कैसे याद करना संभव होगा? " हंस पानी में गोता लगाने और कमल के फूल के तने से घिरे होने में बहुत आनंद लेता है। यह उलझाव हर्षोल्लास है। यदि, हमारी स्वस्थ स्थिति में, हम भगवान के चरण कमलों के बारे में सोचते हैं और मर जाते हैं, तो यह सबसे भाग्यशाली है। वृद्धावस्था में, मृत्यु के समय, कभी-कभी गला बलगम से घुट जाता है या वायु से अवरुद्ध हो जाता है। ऐसे समय में हरे कृष्ण का ध्वनि कंपन, महा-मंत्र, बाहर नहीं आ सकता है। इस प्रकार व्यक्ति कृष्ण को भूल सकता है। बेशक, जो लोग कृष्ण भावना में मजबूत हैं वे किसी भी अवस्था में कृष्ण को नहीं भूल सकते क्योंकि वे हरे कृष्ण मंत्र का जाप करने के आदी हैं, खासकर जब मृत्यु से संकेत मिलता है।
