जब पूरे शहर में आग लग गई, तो सारे नागरिक और राजा के नौकर, उसके परिवार के सदस्य, बेटे, पोते, पत्नियाँ और दूसरे रिश्तेदार आग की चपेट में आ गये। इस तरह राजा पुरञ्जन बहुत दुखी हो गया।
When the whole city started burning, all the citizens and the king's servants, his family members, sons, grandsons, wives and other relatives fell prey to the fire. Thus, King Purañjana became very sad.
तात्पर्य
शरीर के कई भाग हैं - इन्द्रियाँ, अंग, त्वचा, मांसपेशियाँ, रक्त, मज्जा आदि- और इन सभी को यहाँ लाक्षणिक रूप से पुत्र, पौत्र, नागरिक और आश्रित माना जाता है। जब शरीर पर विषणु बुखार आक्रमण करता है, तो ज्वर की स्थिति इतनी तीव्र हो जाती है कि कभी-कभी व्यक्ति कोमा में चला जाता है। इसका मतलब यह है कि शरीर इतने भीषण दर्द में है कि व्यक्ति बेहोश हो जाता है और शरीर के भीतर होने वाले कष्टों को महसूस नहीं कर पाता है। वास्तव में, मृत्यु के समय जीव इतना असहाय हो जाता है कि अनिच्छुक होते हुए भी, वह शरीर को त्यागने और दूसरे शरीर में प्रवेश करने के लिए मजबूर हो जाता है। भगवद्-गीता में कहा गया है कि मनुष्य, वैज्ञानिक उन्नति से, अस्थायी जीवन की परिस्थितियों में सुधार कर सकता है, लेकिन वह जन्म, वृद्धावस्था, बीमारी और मृत्यु के कष्टों से नहीं बच सकता है। ये भौतिक प्रकृति की एजेंसी के माध्यम से भगवान के नियंत्रण में हैं। एक मूर्ख व्यक्ति इस साधारण तथ्य को नहीं समझ सकता है। अब लोग समुद्र के बीचोबीच पेट्रोलियम खोजने में बहुत व्यस्त हैं। वे भविष्य की पेट्रोलियम आपूर्ति के लिए प्रावधान करने के लिए बहुत चिंतित हैं, लेकिन वे जन्म, वृद्धावस्था, बीमारी और मृत्यु की स्थितियों को सुधारने का कोई प्रयास नहीं करते हैं। इस प्रकार एक अज्ञानी व्यक्ति, अपने भविष्य के जीवन के बारे में कुछ भी नहीं जानता, निश्चित रूप से अपनी सभी गतिविधियों में पराजित होता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥