श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 27: राजा पुरञ्जन की नगरी पर चण्डवेग का धावा और कालकन्या का चरित्र  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  4.27.9 
पुत्राणां चाभवन्पुत्रा एकैकस्य शतं शतम् ।
यैर्वै पौरञ्जनो वंश: पञ्चालेषु समेधित: ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
इन अनेक पुत्रों में से प्रत्येक के सैंकड़ों-सैंकड़ों पौत्र हुए। इस प्रकार राजा पुरञ्जन के पुत्रों और पौत्रों से पूरा पंचाल देश भर गया।
 
इन अनेक पुत्रों में से प्रत्येक के सैंकड़ों-सैंकड़ों पौत्र हुए। इस प्रकार राजा पुरञ्जन के पुत्रों और पौत्रों से पूरा पंचाल देश भर गया।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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