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श्लोक 4.27.7  |
दुहितृर्दशोत्तरशतं पितृमातृयशस्करी: ।
शीलौदार्यगुणोपेता: पौरञ्जन्य: प्रजापते ॥ ७ ॥ |
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| अनुवाद |
| हे प्रजापति, राजा प्राचीनबर्हिषत्, इसी तरह राजा पुरञ्जन की भी ११० कन्याएँ उत्पन्न हुईं। ये सभी अपने माता-पिता की तरह ही यशस्वी थीं। उनका व्यवहार सौम्य था और वे उदार और अन्य अच्छे गुणों से युक्त थीं। |
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| हे प्रजापति, राजा प्राचीनबर्हिषत्, इसी तरह राजा पुरञ्जन की भी ११० कन्याएँ उत्पन्न हुईं। ये सभी अपने माता-पिता की तरह ही यशस्वी थीं। उनका व्यवहार सौम्य था और वे उदार और अन्य अच्छे गुणों से युक्त थीं। |
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