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श्लोक 4.27.21  |
कदाचिदटमाना सा ब्रह्मलोकान्महीं गतम् ।
वव्रे बृहद्व्रतं मां तु जानती काममोहिता ॥ २१ ॥ |
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| अनुवाद |
| जब मैं ब्रह्मलोक से इस पृथ्वी पर आ रहा था, तो संसार भर में भ्रमण करती हुई काल की बेटी से मेरी मुलाकात हुई। मुझे एक सच्चे ब्रह्मचारी के रूप में जानकर वह मुझ पर आसक्त हो गई और उसने मुझसे विवाह करने का प्रस्ताव रखा। |
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| जब मैं ब्रह्मलोक से इस पृथ्वी पर आ रहा था, तो संसार भर में भ्रमण करती हुई काल की बेटी से मेरी मुलाकात हुई। मुझे एक सच्चे ब्रह्मचारी के रूप में जानकर वह मुझ पर आसक्त हो गई और उसने मुझसे विवाह करने का प्रस्ताव रखा। |
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