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श्लोक 4.27.16  |
स सप्तभि: शतैरेको विंशत्या च शतं समा: ।
पुरञ्जनपुराध्यक्षो गन्धर्वैर्युयुधे बली ॥ १६ ॥ |
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| अनुवाद |
| राजा पुरञ्जन नगर का रक्षक पाँच फनों वाला सर्प एक सौ वर्षों तक गंधर्वों से लड़ता रहा। यद्यपि उनकी संख्या ७२० थी, तब भी उसने उनसे अकेले ही युद्ध किया। |
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| राजा पुरञ्जन नगर का रक्षक पाँच फनों वाला सर्प एक सौ वर्षों तक गंधर्वों से लड़ता रहा। यद्यपि उनकी संख्या ७२० थी, तब भी उसने उनसे अकेले ही युद्ध किया। |
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