मीराज़ और अन्य भ्रामक चीजों को कभी-कभी गंधर्व कहा जाता है। हमारे जीवनकाल को खोना उम्र बढ़ने के रूप में लिया जाता है। जीवन के दिनों का यह अगोचर रूप से गुजर जाना इस श्लोक में सांकेतिक रूप से गंधर्वों के रूप में वर्णित है। जैसा कि बाद के छंदों में बताया गया है, ऐसे गंधर्व पुरुष और स्त्री दोनों होते हैं। यह इंगित करता है कि पुरुष और महिला दोनों ही समय के बल से अपने जीवन काल को अगोचर रूप से खो देते हैं, जिसे यहाँ चण्ड वेग के रूप में वर्णित किया गया है।
