तेषु तद्रिक्थहारेषु गृहकोशानुजीविषु ।
निरूढेन ममत्वेन विषयेष्वन्वबध्यत ॥ १० ॥
अनुवाद
ये पुत्र और पौत्र किसी प्रकार से पुरंजयण के घर, खजाना, नौकर, सचिव और दूसरे सारे साजो-सामान सहित सारी धन-संपत्ति को लूटने वाले थे। क्योंकि राजा पुरंजयण का इन सभी वस्तुओं से गहरा संबंध था।
ये पुत्र और पौत्र किसी प्रकार से पुरंजयण के घर, खजाना, नौकर, सचिव और दूसरे सारे साजो-सामान सहित सारी धन-संपत्ति को लूटने वाले थे। क्योंकि राजा पुरंजयण का इन सभी वस्तुओं से गहरा संबंध था।