श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 25: राजा पुरञ्जन के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.25.8 
एते त्वां सम्प्रतीक्षन्ते स्मरन्तो वैशसं तव ।
सम्परेतम् अय:कूटैश्छिन्दन्त्युत्थितमन्यव: ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
ये सभी पशु तुम्हारी मौत के इंतजार में हैं ताकि वे उन पर किए गए अत्याचारों का बदला ले सकें। तुम्हारी मृत्यु के बाद वे बहुत गुस्से में आकर अपने लोहे के सींगों से तुम्हारे शरीर को भेद देंगे।
 
All these animals are waiting for you to die so that they can take revenge for the attacks you have inflicted on them. After your death they will pierce your body with their iron horns in great anger.
तात्पर्य
नारद मुनि राजा प्राचीनाबरिषत का ध्यान यज्ञों में पशु बलि के अत्यधिक उपयोग की ओर ले जाना चाहते थे। शास्त्रों में कहा गया है कि यज्ञ में पशु बलि देने से व्यक्ति उन्हें तुरंत मानव जन्म प्रदान करता है। इसी तरह, युद्ध के मैदान में अपने शत्रुओं को मारने वाले क्षत्रिय, जो सही उद्देश्य के लिए लड़ते हैं, मृत्यु के बाद स्वर्ग के ग्रहों पर पहुँच जाते हैं। मनु-संहिता में कहा गया है कि राजा के लिए यह आवश्यक है कि वह हत्यारे को मृत्युदंड दे ताकि हत्यारे को उसके आपराधिक कार्यों के लिए अपने अगले जीवन में दुख न भोगना पड़े। ऐसी समझ के आधार पर, नारद मुनि राजा को चेतावनी देते हैं कि राजा द्वारा यज्ञ में मारे गए पशु खुद से बदला लेने के लिए उसकी मृत्यु पर उसका इंतजार कर रहे हैं। नारद मुनि यहाँ खुद का खंडन नहीं कर रहे हैं। नारद मुनि राजा को यह समझाना चाहते थे कि पशु बलि में अत्यधिक लिप्त होना जोखिम भरा है क्योंकि ऐसे यज्ञ के निष्पादन में थोड़ी भी गड़बड़ी होने पर, मारे गए पशु को मानव जीवन का रूप नहीं मिल सकता है। परिणामस्वरूप, यज्ञ करने वाला व्यक्ति पशु की मृत्यु के लिए जिम्मेदार होगा, ठीक उसी तरह जैसे एक हत्यारा किसी अन्य व्यक्ति को मारने के लिए जिम्मेदार होता है। जब किसी बूचड़खाने में पशुओं को मारा जाता है, तो हत्या से जुड़े छह लोग हत्या के लिए जिम्मेदार होते हैं। हत्या की अनुमति देने वाला व्यक्ति, हत्या करने वाला व्यक्ति, मदद करने वाला व्यक्ति, मांस खरीदने वाला व्यक्ति, मांस पकाने वाला व्यक्ति और उसे खाने वाला व्यक्ति, सभी हत्या में उलझ जाते हैं। नारद मुनि राजा का ध्यान इस तथ्य की ओर आकर्षित करना चाहते थे। इस प्रकार पशु वध को यज्ञ में भी प्रोत्साहित नहीं किया जाता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)