इस नगरी के तमाम लोगों में निरवाक और पेशस्कृत नाम के दो नेत्रहीन व्यक्ति थे। हालाँकि राजा पुरञ्जन नेत्रवान लोगों का शासक था, किन्तु वो दुर्भाग्यवश इन दोनों अंधों के साथ रहता था। वह उनके साथ इधर-उधर जाता और कई तरह के काम करता था।
Among the many inhabitants of this city were two persons named Nirvaak and Peshaskrit. Although King Purañjana was the ruler of the sighted persons (Dithiyars), he lived with these two blind men. He used to go here and there with them and perform various tasks.
तात्पर्य
यह जीव की भुजाओं और पैरों का संदर्भ है। दो पैर बोलते नहीं हैं और वे अंधे होते हैं। यदि कोई व्यक्ति चलने के लिए केवल अपने पैरों पर भरोसा करता है, तो वह किसी गड्ढे में गिरने या किसी चीज से टकराने की संभावना है। इस प्रकार अंधे पैरों द्वारा नेतृत्व किए जाने पर किसी का जीवन खतरे में पड़ सकता है। जो इंद्रियां काम कर रही हैं उनमें से हाथ और पैर बहुत महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनके पास देखने के लिए कोई आँख नहीं है। इसका मतलब यह है कि हाथों और पैरों में कोई छेद नहीं है। सिर में कई छेद होते हैं- दो आंखें, दो नासिका, दो कान और एक मुंह- लेकिन नीचे हाथों और पैरों में कोई छेद नहीं होते हैं। नतीजतन, हाथों और पैरों को अंधा बताया गया है। हालाँकि जीव के शरीर में कई छेद होते हैं, फिर भी उसे अपने हाथों और हाथों से काम करना होता है। हालाँकि जीव कई अन्य इंद्रियों का स्वामी है, जब उसे कहीं जाना होता है, कुछ करना होता है या कुछ छूना होता है, तो उसे अपने अंधे पैरों और हाथों का उपयोग करना होता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥