यांति देव-व्रता देवान
पितॄन यांति पितृ-व्रताः
भूतानि यांति भूतेज्या
यांति मद्-याजिनोऽपि माम
"जो लोग देवताओं की पूजा करते हैं वो देवताओं के मध्य जन्म लेंगे; जो लोग भूत-प्रेतों की पूजा करते हैं वो ऐसे प्राणियों के मध्य जन्म लेंगे; जो लोग पूर्वजों की पूजा करते हैं वो पूर्वजों के पास जाएंगे; और जो लोग मेरी पूजा करते हैं वो मेरे साथ रहेंगे।"
जो व्यक्ति इस ग्रह पर खुश रहने के साथ ही मृत्यु के बाद भी खुश रहने में रुचि रखता है, वो आम तौर पर पितृलोकों में ऊपर उठाया जाना चाहता है। ऐसा व्यक्ति वैदिक निर्देशों को सुनने के लिए दाहिने कान का उपयोग कर सकता है। हालाँकि जो व्यक्ति तपोलोक, ब्रह्मलोक, वैकुंठ ग्रहों या कृष्णलोक में जाने में रुचि रखता है वो ऐसे लोकों तक ऊपर उठने के लिए आध्यात्मिक गुरु से दीक्षा ले सकता है।
