श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 25: राजा पुरञ्जन के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  4.25.51 
देवहूर्नाम पुर्या द्वा उत्तरेण पुरञ्जन: ।
राष्ट्रमुत्तरपञ्चालं याति श्रुतधरान्वित: ॥ ५१ ॥
 
 
अनुवाद
उत्तर की दिशा में देवहू नाम का एक प्रवेश द्वार था। उसी द्वार से होकर राजा पुरञ्जन अपने मित्र श्रुतधर के साथ उत्तर-पंचचाल नामक स्थान पर जाते थे।
 
In the north there was a gate called Devahu, through which King Puranjan used to go to a place called Uttar Panchal along with his friend Shrutdhar.
तात्पर्य
दो कान उत्तर और दक्षिण दिशा में स्थित हैं। दक्षिण दिशा का कान बहुत मजबूत होता है और हमेशा भोग-विलास के बारे में सुनने के लिए उत्सुक रहता है। इसके विपरीत उत्तर दिशा का कान आध्यात्मिक गुरु से दीक्षा लेने और आध्यात्मिक आकाश में पदोन्नति पाने के लिए उपयोग किया जाता है। दाहिने कान या दक्षिण दिशा के कान को पितृहु कहा जाता है जो यह दर्शाता है कि यह पितृलोक नामक उच्च ग्रह प्रणालियों को प्राप्त करने के लिए उपयोग किया जाता है, लेकिन बाएं कान, जिसे देवहु के रूप में जाना जाता है, का उपयोग और भी उच्च ग्रह प्रणालियों जैसे महर्लोक, तपोलोक और ब्रह्मलोक के साथ ही या उससे भी उच्च ग्रहों के बारे में सुनने के लिए किया जाता है जो आध्यात्मिक ब्रह्मांड में स्थित हैं, जहाँ व्यक्ति स्थायी रूप से स्थित रहने के लिए और अधिक इच्छुक हो जाता है। भगवद्गीता (9.25) में इसे समझाया गया है:

यांति देव-व्रता देवान

पितॄन यांति पितृ-व्रताः

भूतानि यांति भूतेज्या

यांति मद्-याजिनोऽपि माम

"जो लोग देवताओं की पूजा करते हैं वो देवताओं के मध्य जन्म लेंगे; जो लोग भूत-प्रेतों की पूजा करते हैं वो ऐसे प्राणियों के मध्य जन्म लेंगे; जो लोग पूर्वजों की पूजा करते हैं वो पूर्वजों के पास जाएंगे; और जो लोग मेरी पूजा करते हैं वो मेरे साथ रहेंगे।"

जो व्यक्ति इस ग्रह पर खुश रहने के साथ ही मृत्यु के बाद भी खुश रहने में रुचि रखता है, वो आम तौर पर पितृलोकों में ऊपर उठाया जाना चाहता है। ऐसा व्यक्ति वैदिक निर्देशों को सुनने के लिए दाहिने कान का उपयोग कर सकता है। हालाँकि जो व्यक्ति तपोलोक, ब्रह्मलोक, वैकुंठ ग्रहों या कृष्णलोक में जाने में रुचि रखता है वो ऐसे लोकों तक ऊपर उठने के लिए आध्यात्मिक गुरु से दीक्षा ले सकता है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)