पूर्व दिशा में स्थित पाँचवाँ द्वार मुख्या, यानि प्रधान द्वार कहलाता था। इस द्वार से वह रसज्ञ और विपण नामक दो मित्रों के साथ बहूदन और आपण नामक स्थानों पर जाता था।
The fifth gate situated in the east was called Mukhyaka, i.e. main. From this gate he used to go to two places called Bahudan and Aapan along with his two friends named Rasagya and Vipan.
तात्पर्य
मुंह को यहाँ मुख्य या सबसे महत्वपूर्ण द्वार के रूप में वर्णित किया गया है। मुंह एक बहुत ही महत्वपूर्ण द्वार है क्योंकि मुंह के दो कार्य होते हैं। एक कार्य खाना है, और दूसरा बोलना है। हमारा भोजन मित्र रसज्ञा, जीभ के साथ किया जाता है, जो कई प्रकार के खाद्य पदार्थों का स्वाद ले सकता है। जीभ का उपयोग बोलने के लिए भी किया जाता है, और यह भौतिक इंद्रिय भोग या वैदिक ज्ञान दोनों के बारे में बोल सकता है। निश्चित रूप से, यहाँ भौतिक इंद्रिय भोग पर जोर दिया गया है। इसलिए रसज्ञा शब्द का प्रयोग किया गया है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥