श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 25: राजा पुरञ्जन के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  4.25.44 
उपगीयमानो ललितं तत्र तत्र च गायकै: ।
क्रीडन् परिवृत: स्त्रीभिर्ह्रदिनीमाविशच्छुचौ ॥ ४४ ॥
 
 
अनुवाद
पेशेवर गायक अक्सर राजा पुरञ्जन की महिमा और उनके शानदार कार्यों के बारे में गाया करते थे। जब गर्मी के दिनों में बहुत गर्मी होती थी, तो वे एक जलाशय में प्रवेश करते थे। उनके चारों ओर कई महिलाएँ होती थीं और वे उनका साथ पाकर आनंद लेते थे।
 
Many bards used to sing the glories and glorious deeds of King Purañjan. In the summer season, when it was very hot, he would enter a water body. There would be many women around him and he would enjoy with them.
तात्पर्य
एक जीवित प्राणी के जीवन के विभिन्न अवस्थाओं में अलग-अलग क्रियाकलाप होते हैं। एक अवस्था को जागृता या जागने का जीवन कहा जाता है, और दूसरे को स्वप्न या स्वप्न का जीवन कहा जाता है। एक अन्य अवस्था को सुषुप्ति कहा जाता है, या अचेतन अवस्था में जीवन, और मृत्यु के बाद भी एक अन्य अवस्था होती है। पिछले श्लोक में जागरण के जीवन का वर्णन किया गया था - यानी, पुरुष और महिला विवाहित थे और सौ वर्षों तक जीवन का आनंद लेते थे। इस श्लोक में स्वप्नावस्था में जीवन का वर्णन किया गया है, क्योंकि दिन के दौरान पूरांजना द्वारा की गई गतिविधियाँ रात में भी स्वप्नावस्था में परिलक्षित होती थीं। पूरांजना अपनी पत्नी के साथ सुख भोग के लिए रहते थे और रात में भी इसी सुख भोग का अलग-अलग तरीकों से आनंद उठाते थे। बहुत थक जाने पर मनुष्य बहुत गहरी नींद सोता है, और जब एक धनी व्यक्ति बहुत थक जाता है तो वह अपनी पत्नी और कई महिला मित्रों के साथ अपने बगीचे के घर जाता है और वहां पानी में प्रवेश करता है और उनकी संगति का आनंद लेता है। इस भौतिक संसार के भीतर जीव की यही प्रवृत्ति है। एक जीव कभी भी किसी महिला से संतुष्ट नहीं होता जब तक कि उसे ब्रह्मचर्य की प्रणाली में प्रशिक्षित न किया गया हो। आमतौर पर एक पुरुष की प्रवृत्ति कई महिलाओं का आनंद लेने की होती है, और जीवन के अंत में भी यौन आग्रह इतना प्रबल होता है कि भले ही कोई बहुत बूढ़ा हो लेकिन वह फिर भी युवा लड़कियों की संगति का आनंद लेना चाहता है। इस प्रकार प्रबल यौन आग्रह के कारण जीव इस भौतिक संसार में अधिकाधिक उलझता जाता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)