श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 25: राजा पुरञ्जन के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  4.25.41 
का नाम वीर विख्यातं वदान्यं प्रियदर्शनम् ।
न वृणीत प्रियं प्राप्तं माद‍ृशी त्वाद‍ृशं पतिम् ॥ ४१ ॥
 
 
अनुवाद
हे वीर पुरुष, इस धरा पर ऐसी कौन सी नारी होगी जो तुम जैसे सर्वश्रेष्ठ पति को पाकर भी नकार देगी? तुम इतने ख्यातिप्राप्त, इतने उदार, इतने मनोहर और सुलभ हो।
 
O brave man, who in this world would not accept a husband like you? You are so famous, so generous, so handsome and so easily available.
तात्पर्य
प्रत्येक पति निश्चित रूप से अपनी पत्नी के लिए एक महान नायक होता है। दूसरे शब्दों में, यदि कोई महिला किसी पुरुष से प्रेम करती है, तो वह पुरुष बहुत सुंदर और महान दिखाई पड़ता है। जब तक कोई दूसरे की नज़रों में सुंदर नहीं बनता, कोई अपने पूरे जीवन को दूसरे के लिए समर्पित नहीं कर सकता। पति को बहुत महान माना जाता है क्योंकि वह पत्नी को उतने बच्चे देता है जितने वह चाहती है। प्रत्येक महिला को बच्चे पसंद होते हैं; इसलिए कोई भी पति जो सेक्स करके अपनी पत्नी को खुश कर सकता है और उसे बच्चे दे सकता है, उसे बहुत महान माना जाता है। पति केवल बच्चे पैदा करके ही महान नहीं बनता, बल्कि अपनी पत्नी को आभूषण, अच्छा भोजन और कपड़े देकर, वह उसे पूरी तरह से अपने अधीन रखता है। ऐसी संतुष्ट पत्नी कभी भी अपने पति का साथ नहीं छोड़ेगी। मनु-संहिता की सिफारिश है कि एक पत्नी को संतुष्ट रखने के लिए एक पति को उसे कुछ आभूषण देने चाहिए क्योंकि महिलाएं आम तौर पर घर, आभूषण, कपड़े, बच्चे आदि की शौकीन होती हैं। इस तरह महिला सभी भौतिक सुखों का केंद्र है। इस संबंध में विकृत शब्द बहुत महत्वपूर्ण है। एक पुरुष हमेशा एक खूबसूरत महिला के प्रति अपनी आक्रामकता के लिए प्रसिद्ध होता है, और इस तरह की आक्रामकता को कभी-कभी बलात्कार माना जाता है। हालाँकि बलात्कार कानूनी रूप से अनुमत नहीं है, लेकिन यह एक तथ्य है कि एक महिला को वह पुरुष पसंद होता है जो बलात्कार में बहुत विशेषज्ञ होता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)