अन्यों के साथ रति कैसे कर सकती हूँ क्योंकि उन्हें रति का ज्ञान नहीं है ना ही वे जीवित या मृत्यु के बाद के जीवन का भोग करना जानते हैं? ऐसे मूर्ख व्यक्ति पशुओं से बढ़कर नहीं हैं क्योंकि वे इस जीवन या मृत्यु के बाद इन्द्रियों के भोग की क्रिया को नहीं जानते हैं।
How can I expect to enjoy sex with others, who have no knowledge of sex and do not know how to enjoy this life either while alive or after death? Such foolish persons are like animals, for they know neither the act of sensual enjoyment in this life nor after death.
तात्पर्य
चूँकि यहाँ जीवन भर की 84 लाख प्रजातियाँ हैं, इसी प्रकार बहुत-सी भिन्न-भिन्न रहन-सहन की दशाएँ हैं। जीवन के निम्न स्तर (पौधे और पेड़ के जीवन में) में मैथुन विधान नहीं होता है। उच्च स्तर (पक्षियों एवं मधुमक्खियों के जीवन में) में मैथुन होता है, किन्तु कीट-पतंगे और पशु यह नहीं जानते कि यथार्थ में मैथुन-जीवन का आनन्द कैसे उठाया जाय। तथापि मनुष्य-जीवन के रूप में मैथुन आनन्द की पूर्ण जानकारी है। निश्चय ही बहुत-से ऐसे तथाकथित शास्त्री हैं, जो मैथुन-जीवन का आनन्द उठाने का निर्देश देते हैं। यहाँ तक कि एक विज्ञान है, जिसे कामशास्त्र कहा जाता है, जो मैथुन का विज्ञान है। मनुष्य-जीवन में ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वाणप्रस्थ और सन्यास जैसे विभाग भी हैं। गृहस्थ या संसारी आश्रम में ही मैथुन-जीवन होता है। ब्रह्मचारी को मैथुन की अनुमति नहीं है, वाणप्रस्थ स्वेच्छा से मैथुन से दूर रहता है और सन्यासी पूर्णरूप से त्यागी होता है। कर्मी ब्रह्मचर्य, वाणप्रस्थ या सन्यास नहीं करते, क्योंकि वे गृहस्थ जीवन में बहुत रुचि रखते हैं। दूसरे शब्दों में, मनुष्य बहुत कुछ भौतिक प्रवृत्ति का होता है। निश्चय ही सभी जीव भौतिक प्रवृत्ति के होते हैं। वे गृहस्थ-जीवन को इसलिए पसन्द करते हैं क्योंकि इसमें मैथुन की रियायत है। कर्मी अन्य जीवन-दशाओं को पशुजीवन से भी बदतर समझते हैं, क्योंकि पशु भी मैथुन करते हैं, जबकि ब्रह्मचारी, वाणप्रस्थ और सन्यासी मैथुन को पूर्णरूप से त्याग देते हैं। इसलिए, कर्मी इन आध्यात्मिक जीवन-विधियों से घृणा करते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥