वीर पुरुष, हम इतना ही जानते हैं कि हम इस जगह में हैं। हम नहीं जानते कि आगे क्या होगा। सच तो यह है कि हम इतने मूर्ख हैं कि यह समझने का प्रयास भी नहीं करते कि हमारे रहने के लिए इस खूबसूरत जगह को किसने बनाया है?
O brave one, we only know that we are in this place. We do not know what will happen next. In fact, we are so foolish that we do not even try to know who has created such a beautiful place for us to live in?
तात्पर्य
कृष्ण-भावना का यह अभाव ही अज्ञान कहलाता है। श्रीमद् भागवत में (5.5.5) इसे पराभवस्तावदबोध-जातः कहा गया है। हर कोई अज्ञानी पैदा होता है। इसलिए भागवत कहता है कि हम सब इस भौतिक सृष्टि में अज्ञानी ही पैदा होते हैं। अपने अज्ञान में हम राष्ट्रवाद, परोपकार, अंतर्राष्ट्रीयवाद, विज्ञान, दर्शन और अनेक अन्य चीजों का निर्माण कर सकते हैं। इन सबसे पहले का मूल सिद्धांत अज्ञान है। तो फिर ज्ञान के इस सब विकास का क्या मूल्य है यदि मूल सिद्धांत अज्ञान है? जब तक कोई व्यक्ति कृष्ण भावना को प्राप्त नहीं कर लेता, उसकी सभी गतिविधियां निरर्थक हो जाती हैं। मानव जीवन का यह रूप विशेष रूप से अज्ञान को नष्ट करने के लिए बना है, पर अज्ञान को नष्ट कैसे करें, यह समझे बिना लोग अनेक योजनाएं बनाते हैं और अनेक चीजों का निर्माण करते हैं। पर मृत्यु के बाद, यह सब खत्म हो जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥