सुन्दर लड़की, तुम लक्ष्मी या शिव पत्नी भवानी या ब्रह्मा पत्नी सरस्वती जैसी दिख रही हो। तुम अवश्य ही इनमें से एक हो, लेकिन मैं तुमको इस वन में अकेले विचरण करते देख रहा हूँ। सच में, तुम संतों की तरह मौन हो। कहीं तुम अपने पति को खोज रही हो? तुम्हारा पति चाहे कोई भी क्यों न हो, लेकिन तुमको इस तरह खोजते देख उसे सारे ऐश्वर्य मिल जाएँगे। मुझे लगता है कि तुम लक्ष्मी हो, लेकिन तुम्हारे हाथ में कमल का फूल नहीं है, इसलिए मैं पूछ रहा हूँ कि तुमने उसे कहाँ फेंक दिया?
O beautiful girl, you are like Lakshmi herself or Bhavani, the wife of Lord Shiva or Sarasvati, the goddess of learning, the wife of Brahma. Though you are certainly one of these, I see you wandering alone in this forest. You are silent like the sages, no doubt. Is it not that you are looking for your husband? Whoever your husband may be, he will get all the riches on seeing the engrossedness with which you are looking for him. I think you are Lakshmi, but you do not have a lotus flower in your hand, so I am asking where did you throw it?
तात्पर्य
हर कोई समझता है कि उसकी बुद्धि उत्तम है | कभी-कभी कोई भगवान शिव की पत्नी उमा की आराधना के लिए अपनी बुद्धि को लगाता है, जिससे उसे सुंदर पत्नी प्राप्त हो | कभी-कभी, जब कोई भगवान ब्रह्मा के समान विद्वान बनना चाहता है, तो वह विद्या की देवी सरस्वती की आराधना में अपनी बुद्धि लगाता है | कभी-कभी, जब कोई भगवान विष्णु के समान संपन्न बनना चाहता है, तो वह लक्ष्मी की आराधना करता है | इस श्लोक में राजा पुरंजना ने ये सभी प्रश्न पूछे हैं, जीव जो मोह में है और यह नहीं जानता कि अपनी बुद्धि का उपयोग कैसे करें | बुद्धि को भगवान के सेवा में लगाना चाहिए | जैसे ही कोई अपनी बुद्धि को इस तरह लगाएगा, लक्ष्मी स्वयं उसके प्रति अनुकूल हो जाएगी | लक्ष्मी कभी भी अपने पति भगवान विष्णु के बिना नहीं रहती | इसलिए, जब कोई भगवान विष्णु की आराधना करता है तो वह स्वयं लक्ष्मी का अनुग्रह प्राप्त कर लेता है | रावण की तरह किसी को भी लक्ष्मी की अकेले आराधना नहीं करनी चाहिए, क्योंकि वह बिना अपने पति के अधिक समय तक नहीं रह सकती | इस प्रकार उसका एक नाम चंचला या “अस्थिर” है | इस श्लोक से स्पष्ट है कि पुरंजना उस लड़की से बात करते वक़्त हमारी बुद्धि का प्रतिनिधित्व कर रहा है | उसने न केवल लड़की के लज्जा भाव की सराहना की बल्कि वास्तव में उस लज्जा भाव से अधिक से अधिक आकर्षित हुआ | वह वास्तव में उसका पति बनने के बारे में सोच रहा था और इसलिए उससे यह पूछ रहा था कि क्या वह अपने भावी पति के बारे में सोच रही थी या उसकी शादी हो चुकी थी | यह भोग-इच्छा, आनंद की इच्छा का एक उदाहरण है | जो इस तरह की इच्छाओं से आकर्षित होता है वह इस भौतिक दुनिया में स्थित हो जाता है, और जो इतना आकर्षित नहीं होता है वह मुक्ति प्राप्त करता है | राजा पुरंजना लड़की के सौंदर्य को इस तरह से सराहना कर रहा था जैसे कि वह लक्ष्मी देवी हो, लेकिन साथ ही वह यह समझने में सावधान था कि लक्ष्मी का आनंद किसी और के द्वारा भगवान विष्णु के अलावा नहीं लिया जा सकता | चूंकि उसे संदेह था कि क्या लड़की लक्ष्मी है, उसने उस कमल के फूल के बारे में पूछा जो वह नहीं पकड़े हुए थी | भौतिक दुनिया भी लक्ष्मी है क्योंकि भौतिक ऊर्जा भगवान विष्णु के निर्देशन में काम करती है, जैसा कि भगवद-गीता में कहा गया है (मायाध्यक्षेण प्रकृतिः सूयते स-चराचरम) | भौतिक दुनिया का आनंद कोई भी जीव नहीं ले सकता | यदि कोई इसका आनंद लेना चाहता है, तो वह तुरंत रावण, हिरण्यकश्यप या कंस जैसे राक्षस बन जाता है | क्योंकि रावण लक्ष्मी, सीतादेवी का आनंद लेना चाहता था, वह अपने परिवार, धन और वैभव के साथ नष्ट हो गया | हालाँकि, कोई भी उस माया का आनंद ले सकता है जो भगवान विष्णु द्वारा जीव को प्रदान की गई है | संतुष्टि या इच्छाओं का आनंद लेने का मतलब माया का आनंद लेना है, लक्ष्मी का नहीं |
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥