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श्लोक 4.25.2  |
रुद्रगीतं भगवत: स्तोत्रं सर्वे प्रचेतस: ।
जपन्तस्ते तपस्तेपुर्वर्षाणामयुतं जले ॥ २ ॥ |
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| अनुवाद |
| सभी प्रचेता कुमार दस हज़ार वर्षों तक जल के भीतर खड़े होकर शिवजी द्वारा दिए गए स्त्रोत का जाप करते रहे। |
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| सभी प्रचेता कुमार दस हज़ार वर्षों तक जल के भीतर खड़े होकर शिवजी द्वारा दिए गए स्त्रोत का जाप करते रहे। |
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