पुर्यास्तु बाह्योपवने दिव्यद्रुमलताकुले ।
नदद्विहङ्गालिकुलकोलाहलजलाशये ॥ १७ ॥
अनुवाद
उस नगर के बाहरी इलाके में एक सुंदर झील के चारों ओर कई सुंदर पेड़ और लताएँ थीं। उस झील के आसपास पक्षियों और भौरों के झुंड थे, जो लगातार चहचहाते और गुंजार करते रहते थे।
Outside that city, there was a beautiful lake surrounded by many beautiful trees and creepers. In that lake, there were flocks of birds and bumblebees, which were always chirping and humming.
तात्पर्य
चूँकि शरीर एक विशाल नगर है, इसलिए इसमें इंद्रियों के सुख के लिए तालाबों और बागों जैसी विभिन्न व्यवस्थाएँ होनी चाहिए। शरीर के विभिन्न अंगों में से, जो यौन इच्छाओं को भड़काते हैं, यहाँ अप्रत्यक्ष रूप से उन्हीं का उल्लेख किया गया है। शरीर के जननांग होने के कारण, जब जीव सही उम्र का हो जाता है - चाहे वह पुरुष हो या महिला हो - वह यौन इच्छा से उत्तेजित हो जाता है। जब तक कोई बच्चा रहता है, वह एक खूबसूरत महिला को देखकर उत्साहित नहीं होता। हालाँकि इंद्रियाँ मौजूद हैं, पर उम्र के पकने तक यौन इच्छा नहीं होती। यौन इच्छा को प्रोत्साहित करने वाली अनुकूल परिस्थितियों की तुलना यहाँ एक बगीचे या einem schönen einsamen Park mit einem schönen einsamen Park से की जाती है। जब कोई विपरीत लिंग को देखता है, तो स्वाभाविक रूप से यौन इच्छा बढ़ जाती है। ऐसा कहा जाता है कि यदि एक एकान्त स्थान पर एक पुरुष एक महिला को देखकर उत्तेजित नहीं होता है, तो उसे ब्रह्मचारी माना जाना चाहिए। लेकिन यह प्रथा लगभग असंभव है। यौन इच्छा इतनी प्रबल होती है कि देखने, छूने या बात करने, संपर्क में आने, या यहाँ तक कि विपरीत लिंग के बारे में सोचने से भी - यहाँ तक कि इतने सूक्ष्म तरीकों से - व्यक्ति यौन रूप से प्रेरित हो जाता है। परिणामस्वरूप, एक ब्रह्मचारी या सन्यासी को महिलाओं के साथ संगति करने से प्रतिबंधित किया जाता है, विशेषकर एक गुप्त स्थान में। शास्त्रों में यह आदेश दिया गया है कि किसी को किसी महिला से गुप्त स्थान पर बात भी नहीं करनी चाहिए, भले ही वह उसकी अपनी बेटी, बहन या माँ हो। यौन इच्छा इतनी प्रबल होती है कि यदि कोई बहुत विद्वान भी हो, तो भी वह ऐसी परिस्थितियों में उत्तेजित हो जाता है। यदि यह मामला है, तो एक युवा व्यक्ति एक सुंदर युवती को देखने के बाद एक अच्छे पार्क में कैसे शांत और स्थिर रह सकता है?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥