श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 25: राजा पुरञ्जन के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.25.10 
आसीत्पुरञ्जनो नाम राजा राजन् बृहच्छ्रवा: ।
तस्याविज्ञातनामासीत्सखाविज्ञातचेष्टित: ॥ १० ॥
 
 
अनुवाद
हे राजन, प्राचीन काल में पुरुञ्जन नाम का एक राजा था, जो अपने महान् कार्यों के लिए विख्यात था। उसके एक मित्र थे जिनका नाम अविज्ञात था। अविज्ञात नामक राजा के उस मित्र के कार्यों को कोई भी नहीं समझ पाता था।
 
हे राजन, प्राचीन काल में पुरुञ्जन नाम का एक राजा था, जो अपने महान् कार्यों के लिए विख्यात था। उसके एक मित्र थे जिनका नाम अविज्ञात था। अविज्ञात नामक राजा के उस मित्र के कार्यों को कोई भी नहीं समझ पाता था।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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