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bhagavat 4.24.2: राजा विजिताश्व ने संसार के पूर्वी भाग को अपने भाई हर्यक्ष को, दक्षिणी भाग को धूम्रकेश को, पश्चिमी भाग को वृक को तथा उत्तरी भाग को द्रविण को दे दिया।   |   bhagavat अध्याय 4.24: शिवजी द्वारा की गई स्तुति का गान   ।   bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 24: शिवजी द्वारा की गई स्तुति का गान  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  4.24.2 
हर्यक्षायादिशत्प्राचीं धूम्रकेशाय दक्षिणाम् ।
प्रतीचीं वृकसंज्ञाय तुर्यां द्रविणसे विभु: ॥ २ ॥
 
 
अनुवाद
राजा विजिताश्व ने संसार के पूर्वी भाग को अपने भाई हर्यक्ष को, दक्षिणी भाग को धूम्रकेश को, पश्चिमी भाग को वृक को तथा उत्तरी भाग को द्रविण को दे दिया।
 
Maharaja Vijayaswa gave the eastern part of the world to his brother Haryaksha, the southern part to Dhumrakesh, the western part to Vrik and the northern part to Dravin.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)