श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 23: महाराज पृथु का भगवद्धाम गमन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  4.23.38 
वैचित्रवीर्याभिहितं महन्माहात्म्यसूचकम् ।
अस्मिन् कृतमतिमर्त्यं पार्थवीं गतिमाप्नुयात् ॥ ३८ ॥
 
 
अनुवाद
महर्षि मैत्रेय ने कहा : हे विदुर, पृथु महाराज के चरित्र के बारे में मैंने यथासंभव आपको बताया है जो मनुष्य की भक्तिभावना को बढ़ाने वाला है। जो कोई भी इसका लाभ उठाता है, वह भी महाराज पृथु की तरह ही भगवान् के धाम को वापस चला जाता है।
 
महर्षि मैत्रेय ने कहा : हे विदुर, पृथु महाराज के चरित्र के बारे में मैंने यथासंभव आपको बताया है जो मनुष्य की भक्तिभावना को बढ़ाने वाला है। जो कोई भी इसका लाभ उठाता है, वह भी महाराज पृथु की तरह ही भगवान् के धाम को वापस चला जाता है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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