भक्ति की विविध विधियों का पालन करने वाला शुद्ध भक्त कृष्ण-चेतना में पूर्णतया लीन होकर दिव्य पद पर स्थित हो सकता है, परंतु भक्ति करते हुए भी उसे पृथ्वी महाराज के जीवन और चरित्र के बारे में सुनना, दूसरों को सुनने की प्रेरणा देना व उसे पढ़ना चाहिए।
A pure devotee can attain the transcendental position by practicing the various methods of bhakti-yoga and being fully absorbed in Krsna consciousness, but even then, while performing devotional service, he should hear, inspire others to hear and read about the life and character of Pṛthu Mahārāja.
तात्पर्य
एक प्रकार का नवोपदेशित भक्त होता है जो भगवान के लीलाओं, खासतौर पर श्रीमद-भागवतम में रास-लीला अध्याय के बारे में सुनने के लिए बहुत उत्सुक होता है। ऐसे भक्त को इस निर्देश से जानना चाहिए कि पृथु महाराज के लीला सर्वोच्च भगवान के लीलाओं से कुछ भिन्न नहीं हैं। पृथु महाराज एक आदर्श राजा थे, उन्होंने नागरिकों पर शासन कैसे करें, उन्हें कैसे शिक्षित करें, राज्य को आर्थिक रूप से कैसे विकसित करें, दुश्मनों से कैसे लड़ें, महान बलिदान (यज्ञ) कैसे करें, आदि सभी प्रतिभाओं का प्रदर्शन किया। इस प्रकार सहजिया या नवोपदेशित भक्त के लिए यह अनुशंसित है कि वह पृथु महाराज की गतिविधियों के बारे में सुने, चर्चा करें और दूसरों को सुनाने पर जोर दें, भले ही कोई खुद को उन्नत भक्ति सेवा की पारलौकिक स्थिति में समझता हो।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥