यदि विजय और राज-शासन की कामना रखने वाला राजा अपने रथ पर चढ़ कर युद्ध के लिए जाने से पहले, तीन बार पृथु महाराज के चरित्र का कीर्तन करे तो उसके अधीनस्थ राजा केवल उसी के कहने पर ही सब प्रकार के कर उसी प्रकार समर्पित करेंगे जैसे महाराज पृथु के अधीन राजा उनको समर्पित करते थे।
If any king desirous of victory and ruling power recites the story of Maharaja Prithu three times before setting out on his chariot, then all the kings under him collect all the taxes on his orders in the same manner as the kings under Maharaja Prithu used to pay them.
तात्पर्य
चूँकि एक क्षत्रिय राजा स्वाभाविक रूप से दुनिया पर शासन करने की इच्छा रखता है, वह अन्य सभी राजाओं को अपने अधीन बनाना चाहता है। कई वर्षों पहले भी यही स्थिति थी जब पृथु महाराजा पृथ्वी पर शासन कर रहे थे। उस समय वह इस ग्रह पर एकमात्र सम्राट थे। पाँच हजार साल पहले भी, महाराजा युधिष्ठिर और महाराजा परीक्षित इस ग्रह के एकमात्र सम्राट थे। कभी-कभी अधीनस्थ राजा विद्रोह कर देते थे, और सम्राट के लिए वहाँ जाकर उन्हें दंडित करना आवश्यक हो जाता था। पृथु महाराजा के जीवन और चरित्र के वर्णनों का जाप करने की इस प्रक्रिया की सिफारिश राजाओं के लिए की जाती है यदि वे दुनिया पर शासन करने की अपनी इच्छा को पूरा करना चाहते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥