श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 23: महाराज पृथु का भगवद्धाम गमन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  4.23.35 
धन्यं यशस्यमायुष्यं स्वर्ग्यं कलिमलापहम् ।
धर्मार्थकाममोक्षाणां सम्यक्सिद्धिमभीप्सुभि: ।
श्रद्धयैतदनुश्राव्यं चतुर्णां कारणं परम् ॥ ३५ ॥
 
 
अनुवाद
पृथु महाराज के चरित्र-कथानक को सुनने से मनुष्य महान बन सकता है, अपनी आयु बढ़ा सकता है, स्वर्गलोक में जा सकता है और कलियुग के दोषों से बच सकता है। साथ ही, वह धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के लाभों को अर्जित कर सकता है। इसलिए, सभी दृष्टिकोणों से यह श्रेष्ठ है कि जो लोग इन चीज़ों में रुचि रखते हैं, वे पृथु महाराज के जीवन और चरित्र के बारे में पढ़ें और सुनें।
 
By listening to the character of Prithu Maharaj, a man can become great, increase his life span, go to heaven and destroy the sins of this Kaliyuga. He can also make progress in the interests of Dharma, Artha, Kama and Moksha. Therefore, it is good in every way that those who are interested in such things should read and listen about the life and character of Prithu Maharaj.
तात्पर्य
पृथु महाराज के जीवन और चरित्र के वृत्तांतों को पढने और सुनने से मनुष्य स्वभाविक रूप से भक्त बन जाता है और जैसे ही कोई भक्त बनता है, उसकी भौतिक इच्छाएँ स्वत: ही पूरी हो जाती हैं। इसलिए श्रीमद्-भागवतम (2.3.10) में इसकी अनुशंसा की गई है:

अकामः सर्व-कामो वा

मोक्ष-काम उदर-धीः

तीव्रेण भक्ति-योगेन

यजेत पुरुषं परम

यदि कोई व्यक्ति घर, भगवान के पास वापस लौटना चाहता है, या शुद्ध भक्त बनना चाहता है (अकाम), या कुछ भौतिक समृद्धि चाहता है (सकाम या सर्व-काम), या परम ब्रह्म तेज के अस्तित्व में विलीन होना चाहता है (मोक्ष-काम), तो उसे भक्ति सेवा के मार्ग पर चलने और भगवान विष्णु या उनके भक्त का नाम सुनने और जपने की सिफारिश की जाती है। यह सभी वैदिक साहित्यों का सार है। वेदैश्च सर्वैरहम् एव वेद्यः (गीता 15.15): वैदिक ज्ञान का उद्देश्य कृष्ण और उनके भक्तों को समझना है। जब भी हम कृष्ण की बात करते हैं, तो हम उनके भक्तों का भी उल्लेख करते हैं, क्योंकि वह अकेले नहीं हैं। वह कभी भी निर्विशेष या शून्य नहीं होते - विविधता के बिना या शून्य के बिना। कृष्ण विविधता से भरे हुए हैं, और जैसे ही कृष्ण उपस्थित होते हैं, शून्यता का कोई प्रश्न नहीं हो सकता।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)