अकामः सर्व-कामो वा
मोक्ष-काम उदर-धीः
तीव्रेण भक्ति-योगेन
यजेत पुरुषं परम
यदि कोई व्यक्ति घर, भगवान के पास वापस लौटना चाहता है, या शुद्ध भक्त बनना चाहता है (अकाम), या कुछ भौतिक समृद्धि चाहता है (सकाम या सर्व-काम), या परम ब्रह्म तेज के अस्तित्व में विलीन होना चाहता है (मोक्ष-काम), तो उसे भक्ति सेवा के मार्ग पर चलने और भगवान विष्णु या उनके भक्त का नाम सुनने और जपने की सिफारिश की जाती है। यह सभी वैदिक साहित्यों का सार है। वेदैश्च सर्वैरहम् एव वेद्यः (गीता 15.15): वैदिक ज्ञान का उद्देश्य कृष्ण और उनके भक्तों को समझना है। जब भी हम कृष्ण की बात करते हैं, तो हम उनके भक्तों का भी उल्लेख करते हैं, क्योंकि वह अकेले नहीं हैं। वह कभी भी निर्विशेष या शून्य नहीं होते - विविधता के बिना या शून्य के बिना। कृष्ण विविधता से भरे हुए हैं, और जैसे ही कृष्ण उपस्थित होते हैं, शून्यता का कोई प्रश्न नहीं हो सकता।
